मरि ना लो नदीयार माझारे ओ ना रूप
मरि ना लो नदीयार माझारे ओ ना रूप
गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन (नरहरि दास) से।
नवद्वीप के सौन्दर्य का वर्णन करने वाला एक भजन, जिस पर देवकीनन्दन दास की छाप है। इस संग्रह के उन कई कवियों में वे भी हैं जो केवल इसी एक पद से जाने जाते हैं।
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