के याबे के याबे भाइ भब सिन्धु पार
के याबे के याबे भा-इ भब-सिन्धु पार
गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन (नरहरि दास) से।
लोचन दास ठाकुर का जन्म लगभग 1520 में कोग्राम गाँव में हुआ था। वे नरहरि सरकार ठाकुर के शिष्य थे। इस पुस्तक में आगे नरहरि दास का अलग अध्याय है, और वहाँ बताई गई नामों की उलझन के कारण इस साइट के अपने अभिलेख इस सम्बन्ध की पूरी पुष्टि नहीं कर पाते। लोचन दास की अपनी मुख्य और अलग से प्रमाणित रचना चैतन्य-मंगल है। यह चैतन्य महाप्रभु के जीवन का पूरा वृत्तान्त है, जो उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा से लिखा और जो मुरारि गुप्त की पहले की संस्कृत जीवनी पर आधारित है। बाद में इस पुस्तक का नाम बदला गया, ताकि इसे वृन्दावन दास ठाकुर के अपने चैतन्य-भागवत से अलग पहचाना जा सके, जिसका नाम पहले यही था। यहाँ उनकी छाप वाले छह भजन गौर-चन्द्रिका से आगे बढ़कर अधिक विविध विषयों तक जाते हैं, जिनमें लक्ष्मी देवी से जुड़ा एक कथा-भजन भी है।
6 भजन
के याबे के याबे भा-इ भब-सिन्धु पार
जीबेर भाग्ये अबनी बिहरे दोन भा-इ
हेर देखिया नयन भरिया
एक-दिन मने पहुं कैल आचम्बित
पतिब्रता लक्ष्मी-देबी पति-गता प्राण
घरेरे आ-इल प्रभु रत्न लैञा