अपरुप चन्द उदय नदिय पुरे
अपरूप चान्द उदय नदीया-पुरे
गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन (नरहरि दास) से।
यदुनाथ दास की छाप वाले गौर-चन्द्रिका के दो भजन। एक में नवद्वीप पर उगते अद्भुत चन्द्रमा का वर्णन है, दूसरे में गौरांग और गदाधर पण्डित का एक ही रूप में साथ होने का चित्र है।
2 भजन