प्रफुल्लित कनक कमल मुख मण्डल, नयन खण्जन ताहे साजे
प्रफुल्लित कनक-कमल मुख-मण्डल, नयन खण्जन ताहे साजे
गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन (नरहरि दास) से।
एक भजन, जिसमें कमल जैसे मुख और खंजन पक्षी जैसी चंचल आँखों का वर्णन है। इस पर विजयानन्द दास की छाप है।
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