शचीर आङ्गिना माझे भुबन=मोहन साजे
शचीर आङ्गिना माझे भुबन=मोहन साजे
गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन (नरहरि दास) से।
मुरारि की छाप वाले गौर-चन्द्रिका के दो भजन, जिनमें शची के आँगन और उनके पुत्र के अपने आकर्षण का वर्णन है। इनका नाम मुरारि गुप्त से मिलता है, पर इन्हें वही व्यक्ति नहीं मान लेना चाहिए। मुरारि गुप्त वैद्य और भक्त थे, जिनकी लिखी चैतन्य महाप्रभु की संस्कृत जीवनी, वृन्दावन दास ठाकुर और लोचन दास ठाकुर, दोनों की बंगाली जीवनियों का आधार है।
2 भजन