Vaishnava Songs
खोज

“तुलसी” के परिणाम

23 भजन · 11 पद अर्थ में

1 पद अर्थ में 7

भक्तिविनोद ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 7अर्थ
    तुलसी के दर्शन से मेरे प्राण शांत हो जाते हैं, क्योंकि मैं जानता हूँ कि वे माधव को प्रिय हैं। और गौर को प्रिय शाक का सेवन करके मैं अपने जीवन को सफल मानता हूँ।
2 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 3अर्थ
    गौरांग के भक्तों को प्रिय वेश धारण करके, मैं तिलक और तुलसी की माला से सुशोभित रहूँगा।
  • पद 7अर्थ
    एक वेदी पर मैं तुलसी महारानी को स्थापित करूँगा, और वहाँ कीर्तन के लिए वाद्य-यंत्र भी रखूँगा।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 4अर्थ
    आपके प्रसाद से ही मैं अपने शरीर का पोषण करूँगा। आपको चढ़ाई गई तुलसी की पत्तियों और मंजरियों की सुगंध का आनंद लूँगा।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · कल्याण-कल्पतरु

  • पद 4अर्थ
    हे भाई, अगुरु और चन्दन न हो तो मिट्टी का तिलक लगा ले। हार के बदले तुलसी-माला पहन। इस तरह कामनाओं के फंदे और सुख-भोग के बुरे विलास को घटा, और संसार की आग से छूट जा।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतमाला

  • पद 4अर्थ
    तुलसी, भक्ति के चिह्न, और भक्तों का दर्शन भी उद्दीपनों में सम्मिलित हैं, जो भक्ति-रस के अमृत का आस्वादन कराते हैं। यह सब श्रील रूप गोस्वामी और श्रील सनातन गोस्वामी द्वारा सिखाया गया है।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतमाला

  • पद 5अर्थ
    . . . पक्षी, भ्रमर, मृग तथा अन्य पशु, वन-कुंज, तुलसी, फूलों वाली लताएँ, कर्णिकार वृक्ष, कदम्ब वृक्ष तथा अन्य वृक्ष, और वृन्दावन का समस्त वैभव, ये सब भगवान कृष्ण से सम्बन्धित वस्तुएँ हैं। ये उद्दीपन रसों को अत्यंत सुन्दर बना देते हैं।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · बाउल संगीत

  • पद 1अर्थ
    …में तू गृहस्थों से भी अधिक भोगी है। इसके अलावा तू दिखावे के लिए लंगोटी पहनता और हाथ में तुलसी-माला रखता है, पर बोझ ढोने वाले पशु की तरह विभिन्न स्त्रियों को अपनी सेवा-दासी बनाने के फंदे में फँसाने का भार उठाता है।…
1 पद अर्थ में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 2अर्थ
    वे बार-बार तुलसी अर्पित करते रहे। बार-बार वे गरज कर पुकारते रहे। इस प्रकार अद्वैत आचार्य भगवान गौर को नवद्वीप में ले आए। इस प्रकार उन्होंने सबको जन्म-मृत्यु के संसार से तार दिया।
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर

  • पद 1अर्थ
    …जय! श्री राधा-कृष्ण, गोप-गोपी, गौ, गोवर्धन, वृन्दावन, राधा-कुण्ड और यमुनाजी की जय! श्री तुलसी देवी की जय! श्री गंगाजी की जय! श्री सुरभि-कुंज की जय! श्री नामहट्ट की जय! श्री भक्ति देवी की जय! श्री गायक, श्रोता और भक्तवृन्द की जय!…