'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
श्रीमान राधेश्याम प्रभु की 42 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
42 भजन
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
अक्रोध परमानन्द नित्यानन्द राय्
(आमि) जमुना-पुलिने, कदम्ब-कानने,
भाइ रे
एखोन बुझिनु प्रभु! तोमार चरण
(प्रभु हे!)
कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
कबे श्री-चैतन्य मोरे कोरिबेन दोया
कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे)
कुङ्कुमाक्त-काञ्चनाब्ज-गर्व-हारि-गौरभा
कृष्ण जिनका नाम है, गोकुल जिनका धाम है
गाय् गोरा मधुर् स्वरे
गोपीनाथ मम निबेदन शुनो
गौराङ्ग करुणा कोरो, दीन हीन जने
गौराङ्ग तुमि मोरे दया ना छाडिह
गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद,
जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
जय जय राधा कृष्ण जुगल-मिलन
जय राधा गिरि-वर धारि
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
जय राधे जय राधे राधे
जीव् जागो, जीव् जागो, गौरचान्द बोले
तुमि सर्वेश्वरेश्वर, ब्रजेन्द्र-कुमार!
उथाल् देउ आसिछे छुटिया
दोयाल् निताइ चैतन्य बोले नाच रे आमार मन
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
नव गौर-वरं नव-पुष्प-शरं
(श्ब् 12.3.51)
निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
परम कोरुण, पहू दुइ जन
बोरो सुखेर् खबोर् गाइ
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन
मधुरं मधुरेभ्यो 'पि
मानस, देहो, गेहो, जो किछु मोर्
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
यशोमती-नन्दन, ब्रज-बरो-नागर,
वृन्दावन-वासी जत वैष्णवेर गण
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,
सुन्दर कुण्डल नैन विशाल, गले सोहे वैजन्ती-माला
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्