ओरे मन कर्मेर कुहरे गेलो काल
ओरे मन कर्मेर कुहरे गेलो काल
“ओ” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
15 भजन
ओरे मन कर्मेर कुहरे गेलो काल
ओरे मन कि बिपद होइलो आमार
ओरे मन क्लेश-ताप देखि जे अशेष
ओरे मन, बाड़िबार आशा केनो कोरो'?
ओरे मन बारिबार आशा केनो कोरो
ओरे मन बोलि शुनो तत्त्व-बिबरण
ओरे मन भालो नाहि लागे ए सोंसार
ओरे मन भुक्ति-मुक्ति-स्पृहा कोरो दूर
ओरे, वृन्दावनेर् नन्द दुलाल्
हरि हे
ओहे भाइ, मन केनो ब्रह्म हो'ते चाय
ओहे!
ओहे हरि-नाम तब महिमा अपार
ओहे हरिनाम, तव महिमा अपार
ओहे, प्रेमेर ठाकुर गोरा