दण्डवत् 10
ष्री - कृष्ण जीया मथुरावतीर्ण
“द” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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ष्री - कृष्ण जीया मथुरावतीर्ण
आनीत-कंस-सन्त्रास
जय ष्री-मथुरा-नाथ
अद्य-ष्वो-गमन-व्याज
ष्री-जगन्नाथ नीलाद्रि
ष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
नमो ब्राह्मण-रूपाय
पषाण-धातु-मृद्-दारु-- सिकता-मणि-लेख-ज
सर्व-षस्त्राब्धि-पीयुष
ष्री-कृष्ण तव कारुण्य
सूरसेन-महाराज
कंसासुर-बलोद्विग्न
भाद्र-कृष्णाष्टमी-जात
वसुदेव-स्तुतं साक्षाद्
पितृ-प्राग्-जन्म-कथक
कंस-घातित-दुर्गं त्वां
अद्दत्त-पूर्व-स्वपदाब्ज-सौहृद
वसुदेवोदितोपात
औत्थानिकोत्सवाम्बाभि
यषोदोत्सण्ग-पर्यण्कं
यषोदा-स्तन्य-मुदित
गर्ग-वाक्-चातुरी-हृष्ट
जयाण्गान-गण-प्रेक्ष्य
प्रसिद बाल-गोपाल
दधि-निर्मन्थनारम्भि
दृष्टार्जुन-तरु-द्वन्द्व
गोप-विस्मापन-क्रीड
परमात्मन् वासुदेव
उपनन्दाहित-प्रीते
व्रजानन्दाकर-क्रीड
जय वत्सासुर-ध्वंसिन्
प्रातर्-भोजन-संयुक्त
प्रातर्-वन्याषनाकान्क्षिन्
दुर्बुद्धि-सुप्त-पीनाही
पौगण्डाख्यात-कौमार
अदृष्य-तर्णकान्वेषिन्
गो-गोपी-स्तन्य-पाहन्त
विधि-वाक्यामृताब्धीन्दुर्
परमेष्वर लक्ष्मीसा
धन्य-धन्य-व्रज-वधू
ब्रह्म-प्रसाद-सुमुख
पौगण्डागम गोपाल
जय ष्रीदाम-सुबल
गोपी-सौभाग्य-संभाव्यं
यमुना-तट-सण्चरिन्
तुण्ग-नीप-समारुढम्
नमस् ते स्वीय-दुःक-घ्न
नाग-पत्नी-स्तुति-प्रीत