कत ‘प्ल्यान’ करे तारा भाल थाकिबारे
कत ‘प्ल्यान’ करे तारा भाल थाकिबारे
“क” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
107 भजन · पृष्ठ 1 / 3
कत ‘प्ल्यान’ करे तारा भाल थाकिबारे
कदम्ब तरुर डाल नामियाछे भूमे भाल
कदाचित् कालिन्दी-तट-विपिन-सङ्गीतक-रवो
कनक धराधर मद-हर देह
कनया कषिल मुख-शोभा
कन्दर्प-कोटि-रम्याय स्फुरद्-इन्दीवर-त्विषे
कपटम् इदं तव विन्दति हरे
कबे आहा गौराङ्ग बोलिया
कबे कृष्ण-धन पाब हियार माझारे थोब
कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
गुरुदेव्!
कबे प्रभु अनुग्रह हबे
कबे मुइ बैष्णबे चिनिबो हरि हरि
कबे मोर मूढ़ मन छाड़ि अन्य ध्यान
कबे मोर मूढ मन छारि' अन्य ध्यान
कबे मोर शुभ-दिन होइबे उदोय
कबे मोर शुभदिन होइबे उदोय
गुरुदेव्!
कबे श्री-चैतन्य मोरे कोरिबेन दोया
कबे ह'बे बोलो से-दिन आमार्
कबे ह'बे हेनो दशा मोर
कर-योडे नबद्वीपे बन्दिब निमा-इ
करङ्ग कौपीन लञा छेँड काँथा गाय दिया
करारविन्देन पदारविन्दं
कर्म-काण्ड-स्वरूपो'यम् मागधः कंस-बान्धवः
कलयति नयनं दिशि दिशि वलितम्
सीदति सखि मम हृदयम् अधीरम्
कलि कबलित कलुष जडित
कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे)
कलि-घोर-तिमिरे गरासल जग-जन
कलि तिमिराकुल अखिल लोक देखि
कलि-युग-पाबन बिश्वम्भर
कलि-युग मत्त मतङ्गज मरदने कुमति करिणी दूरे गेल
कलि-युगे श्री कृष्ण चैतन्य अबतार
कलि-युगे श्री-चैतन्य अबनी करिला धन्य
कंस-कारित-मञ्चौघ रङ्ग-भू-गमनोत्सुक
कंस-योषित्-समाश्वासिन् नादिष्ट-मृत-सत्क्रिय
काक-पक्ष-धर श्रीमद्-वसन्तित-निदाघ हे
काञ्चन-यूथी कुसुम ल-इ गोरी
काण्चा से सोणार तनु डगमगि अङ्ग
कानने सबहुँ कुसुम परकाश
कानु-कथा शुनि गदगद भाष
तिष्ठन् वृन्दाटवी-कुञ्जे विज्ञप्तिम् विदधात्य् असौ
कत कत ब्रज नब बाला
तुमि देब नारायण जगत-अधिकारी
कि आनन्द नदीया-नगरे
कि आनन्द शचीर भबने
कि आर बोलिबो तोरे मन