आ ओत पिरीति मूरति मय सागर
आ-ओत पिरीति मूरति-मय सागर
“आ” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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आ-ओत पिरीति मूरति-मय सागर
आगे जनमिल निता-इ चान्द
आँचरे मुख-शशि गोय
आजि आङ्गिन पर नदीया बालक साञे
आजि रसे बादर निशि
आजु आनन्दे निता-इ-चान्दे
आजु कत ना आनन्द मने
आजु कि आनन्द नदीया-नगरे, जगा-इ माधा-इ दोहे देखिबारे
आजु कि आनन्द श्री-शची-भुबने रजनी-प्रभात-काले
आजु कि आनन्द सङ्कीर्तने
आजु गो-धूलि समय शुभ-क्षण, गौर गुण मणि भुबन मोहन,
आजु गोरा नगर-कीर्तने
आजु नव श्याम विनोदिनी रा-इ
आजु पूर्णिमा साज समये राहु शशी गरासि
आजु बिपिने या-ओत कान
आजु बिरह-भाबे गौराङ्गसुन्दर
आजु शची-नन्दन-नब-अभिषेक
आजु शुभ-क्षणे निता-इ-चान्देर
आजु शुभ-क्षणे पोहा-इल निशि
आजु स्नेहेते बिह्वोल हैया
आत्म-निवेदन, तुवा पदे कोरि’,
आत्म-समर्पने गेला अभिमान्
तूमि त दयार सिन्धू अधम-जनार बन्धु
आत्मीय सबाइ भाइ, आत्मार सम्बन्धे
आध आध अङ्ग मिलल राधा कानु
आनन्द कन्द निता-इ चान्द
राधा दामोदर-प्रेष्ठा
श्री-कृष्णः परमानन्दो गोविन्दो नन्द-नन्दनः
आनीत-कंस-सन्त्रास-प्रोषित-ज्ञाति-बान्धव
आपनि अचरि ‘प्रभु’ जीवेरे शिखय
आपने नचिते यबे प्रभुर मन हैल
आबेशे अबश अङ्ग धीरे धीरे चले
आमार एमोन भाग्य कोत दिने ह'बे
आमार जीवन, सदा पापे रत,
आमार निताइ मिले ना भोला मन
`आमार’ बोलिते प्रभु! आरे किछु नाइ
आमार समान हीन नाहि ए सोंसारे
आमि अति दिन-मति ब्रज-कुञ्जे निबसति
आमि अति पामर दुर्जन
हरि हे
(आमि) जमुना-पुलिने, कदम्ब-कानने,
आमि तो' दुर्जन अति सदा दुराचार
हरि हे
आमि तो’ स्वानन्द-सुखद-बासी
आमि तोमार् दुःखेर् दुःखी सुखेर् सुखी,
हरि हे
(आमि) पथे पथे घुरि भिखारिणी
हरि हे