‘निर्द्वन्द्व’ वैष्णव शुधु जप करे माला
‘निर्द्वन्द्व’ वैष्णव शुधु जप करे माला
“न” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
115 भजन · पृष्ठ 1 / 3
‘निर्द्वन्द्व’ वैष्णव शुधु जप करे माला
न योग-सिद्धिर् न ममास्तु मोक्षो
नगरे नगरे गोरा गाय
नचे नचे निताइ गौर् गुण मणिय
नदीया आकाशे आसि उदिल गौराङ्ग-शशी
नदीया-आकाशे सङ्कीर्तन-मेघ साजे
नदीया-गोद्रुमे नित्यानन्द महाजन
नदीया-नगरे गोरा-चरित अमृत
नदीया-नगरे हैल ध्वनि
नदीयार अति पुण्यबती पति
नदीयार घाटे भा-इ कि अद्भुत तरि
नदीयार नारी पुरुष सुकृति मानि
नन्द के आनन्द भाइयो जय कन्हैया लाल् की
नन्द-तनुजनुर् अद्य व्यलम्
नन्द-नन्दन चन्द्र-चन्दन
नन्द-महीपति-जत
साक्षान् महत्तम-महाघन-चिद्-विलास-
नबद्वीप-गगने उयल दिन राति
नबद्वीपे शुनि सिंह-नाद
नमस्कृत्य प्रवक्ष्यामि देव-देवं जगद्-गुरुम्
नमस् ते नरसिंहाय
प्रियः सो ’यं कृष्णः सह-चरि कुरु-क्षेत्र-मिलितस्
नमस् ते स्वीय-दुःख-घ्न सर्प-क्रीडा-विशारद
नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
नमो नमः तुलसि महाराणी,
नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसि नमो नमः
यानि कानि च पापानि
वृन्दायै तुलसी-देव्यै
नमो नमस् ते त्रिदशेश्वराय
(ॐ नमो भगवते वासुदेवाय)
नर हरि-नाम अन्तरे अछु भावह हबे भब-सागरे पार
नव गौर-वरं नव-पुष्प-शरं
नव घन कानन सोहन कुञ्ज;
नव-जलधर-वर्णं चम्पकोद्भासि-कर्णं
नन्द-नन्दन सङ्गे सोहन
नव-नीरद-निन्दित-कान्ति-धरं
स्फुरद्-अमल-मधूली-पूर्ण-राजीव-राजन्-
गौरीम् गोष्ठवनेश्वरीम् गिरिधर-प्राणाधिक-प्रेयसीम्
नवीन-नीरद-श्यामम्
नहि उठल दोंहे कुण्डक-तीर
ना कोरोलुँ करम, गेयान नाहि भेलो,
नाचत गौर नटन पण्डित-बर
नाचत गौर निखिल नट-पण्डित निरुपम भङ्गी मदन-मद हर-इ
नाचत गौर परम सुख-सदना
नाचत गौर पूरब रसे भोर
नाचत गौरचन्द्र नट-भूप
नाचत नगरे नागर गौर हेरि मूरति मदन भोर
नाचत नट-बर गौर-किशोर