यत यत अबतार सार
यत यत अबतार सार
“य” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
13 भजन
यत यत अबतार सार
यदा हि जीव-विज्ञानं पूर्णम् आसीन् मही-तले
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
यदि ते हरि-पाद-सरोज-सुधा
यशोमती-नन्दन, ब्रज-बरो-नागर,
यस्याः कदापि वसनाञ्चल-खेलनोत्थ-
यामिहे कमिह शरणं सखी-जन-वचन-वञ्चिता
युगल चरणे प्रीति, परम आनन्द ताथि,
ये जन गौराङ्ग भजिते चाय
येषां रागोदितः कृष्णे श्रद्धा वा विमलोदिता
योग-पीठोपरि-स्थित, अष्ट-सखी-सुवेष्टित,
योगीर आसने वसेछिल विश्वामित्र
यौवने जखोन, धन-उपार्जने,