'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
“ग” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
गगनहि निमगन दिनमणि कान्ति
गजेन्द्र-गमने निता-इ चलये मन्थरे
गजेन्द्र-गमने याय स-करुण दिठे चाय
गतिं दृष्ट्वा यस्य प्रमद-गज-वर्ये 'खिल-जन
गम्भीरे भितरे गौर राय
नमः पन्नग नद्धाय वैकुण्ठ वशवर्तिने
तुमि देब निरञ्जन तुमि प्रजापति
गहन बिरहक लागि
गाइते गाइते नाम कि दशा होइलो
गाइते गोविन्द-नाम्, उपजिलो भाव-ग्राम्,
गाङ्गेय-चाम्पेय-तडिद्-विनिन्दि
परितोषित-गोपवधू-पटलम्
वृन्दावने विहरतोर् इह केलि-कुञ्जे
गाय् गोरा मधुर् स्वरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
गिरि-पुजेयं विहित केन अरचि शक्र-पदम् अभयं येन
गिरिबर-कन्दरे सुन्दर श्याम
गीता-शास्त्रम् इदं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः पुमान्
गुरु-जन-नयन बिधुन्तुद मन्द
जय प्रभुपाद
गुरु दुरु बञ्च उजोरल चन्द
गुरुदेव्!
गुरुदेव बलेछिल कनिष्ठ ए-सब
गुरुदेव्!
गुरुदेवे, व्रज-वने, व्रज-भूमि-वासी जने,
गुरौ गोष्ठे गोष्ठालयिषु सुजने भूसुर-गणे
गुरौ मन्त्रे नाम्नि प्रभुवर-शचीगर्भज-पदे
गो-रख जागाइ शिङ्ग-ध्वनि शुन-इते
गोउराङ्ग सुन्दर, प्रेम जलधर तप्त काञ्चन काय
गोकुल-पति-कुल-तिलक त्वम् असीह
गोकुल-मङ्गल-वंशी
गोठ बिजयी ब्रज-राज किशोर
गोद्रुम-धामे भजन-अनुकूले
वपुर्-अतुल-तमाल-स्फीत-बाहूरु-शाखो-
मधुर-मृदुल-चित्तः प्रेम-मात्रैक-वित्तः
गोपी-गण-कुच-कुङ्कुमे रञ्जित
गोपी-सौभाग्य-सम्भाव्यं गो-धूलि-च्छुरितालकम्
गोपीनाम् कुच-कुङ्कुमेन निचितम् वासः किम् अस्यारुणम्
गोपीनाथ आमार उपाय नाइ
गोपीनाथ घुचाओ सोंसार-ज्वाला
गोपीनाथ मम निबेदन शुनो
गोबिन्देर अङ्गे पहुं निज अङ्ग दिया
गोरा अबतारे यार न हैल भक्ति-रस
गोरा अभिषेक कथा अद्भुत कथन
गोरा-गुण गा-ओ शुनि
गोरा गुण-मणि प्राण प्रिया-सह बिलसये शोज बासर घरे
गोरा गुण-मणि सुघड शेखर परम मुदित हियाय