भकति रतन खनि उघाडिया प्रेम मणि
भकति-रतन-खनि उघाडिया प्रेम-मणि
“भ” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
44 भजन
भकति-रतन-खनि उघाडिया प्रेम-मणि
भक्त-गण-श्री-चरणे मोर ए-इ निबेदने
भगवच्-छक्ति-कार्येषु त्रिविधेषु स्व-शक्तिमान्
सूर्य-कोटि-प्रकाश बिमल श्याम-कान्ति
भज गोविन्दं भज गोविन्दं
भज गोविन्द भज गोविन्द भज गोविन्द का नाम रे
गौराङ्ग बोलिया दु’ बाहु तुलिया नाचिया नाचिया बेडाओ रे
भज भकत-वत्सल श्री-गौरहरि
भज भज हरि, मन दृढ करि', मुखे बोलो ता’र नाम
भज मन नन्द-कुमार
भज मन सतत ह-इया निर्द्वन्द्व
भज रे भज रे आमार मन अति मन्द
यमुना-जल-कणिकाभिर् उपेते सङ्गतम् उज्ज्वल-कुञ्ज-निकेते
हरि हे!
भजने उत्साह यार भितरे बाहिरे
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन
भब सागर बर दुरतर दुरग्रह
भबार्णबे पो'डे मोरे आकुल पराण
भाग्यबान् शची जगन्नाथ
भाद्र-कृष्ण-अष्टमीते देबकी-उदरे
भाब-भरे गर गर चित
भाबना भाबना मन तुमि अति दुष्ट
भाबाबेशे गोराचान्द बिभोर ह-इया
भाबे गर गर निता-इ सुन्दर
भाबे तरल तनु अनुपम हेम रे
भाबे भरल हेम तनु अनुपम रे, अहर्-निशि निज-रसे भोर
भाबेर आबेशे रहु सीता-पति मोर पहुं
भामिनि पृच्छ न वारं वारम्
गौराङ्ग सुन्दर नट पुरन्दर
भालिरे नाचेरे मोर शचीर दुलाल
भाले गौरा-गदाधरेर आरति नेहारि
भावो ना भावो ना, मन, तुमि अति दुष्ट
श्री-भीष्म उवाच
भीष्मक-पुर-भग-चलित-रज-निवह-रज्य-वलित
भुबन-आनन्द-कन्द बलराम नित्यानन्द
भुबन-पाबन निता-इ मोर
भुबन-मनो-चोरा गोकुल-पति गोरा
भुबन-मोहन गोराचान्द
भुबने जय जय, निता-इ दयामय, हरये भब-भय, निज-गुणे
भुलिया तोमारे, संसारे आसिया,
भुले भुले रे दोंहार रूपे नयन भुले
भोजन-लालसे रसने आमार
हरि हे
भ्रातुर् अन्तकस्य पत्तने ’भिपत्ति-हारिणी