'राधा कृष्ण' बोल् बोल्
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
“र” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
प्रातः पीत-पटे कुचोपरि रुषा घूर्णाभरे लोचने
रङ्गे नाचये शचीर बाला
रजनी-प्रभाते शची-देबी चिते आनन्देर नाहि ओर
रति प्रेम स्नेह मान प्रणय ओ रागाख्यान
रत्य्-आस्वाद हेतु जत बिभाब नामेते ख्यात
रध-रक-शशधर मुरली-कर गोकुल-पति-कुल-पल जय जय कृष्ण हरे
राधा हरिर् अपि पुलकि-वसन्तम्
रधे मैशीर् द्रष्टुम् अनङ्गम्
रमणी-शिरोमणि बृषभानु-नन्दिनी
रमते रमं परितः कृष्णः
रमो रमनुज इति युगलम्
रम्य-तिलक-नव-तुलसी-दल-भर-वन-मलति-विकसी
रस-तत्त्व नित्य जैछे ब्रज-तत्त्व नित्य तैछे
रस-परिपाटी नट कीर्तन लम्पट
रसबती राधा रसमय कान
रसिक-नागरी- गण-शिरोमणि
रसेर आधार जिनि ताँर चित्ते रस-खनि
रा-इ हे अब तेजह मान
रागेर भजन-पथ कहि एबे अभिमत
राज-रानी मीरा भिखारिनी
राजत्-किरीट-मणि-दीधिति-दीपितांशम्
राढ देशे नाम एकचक्र ग्राम
राढ माझे एकचाका नामे आछे ग्राम
राधा-कुन्ड-तट-कुञ्ज-कुटीर्
राधा-कृष्ण कोरो ध्यान, स्वप्ने-ओ ना बोलो आन,
राधा-कृष्ण-गुण-गान मिथासक्ति सम्बर्धन
राधा-कृष्ण प्राण मोर जुगल-किशोर
राधा-कृष्ण-सेवोन् मुञि जीवने मरणे
राधा-कृष्ण! निवेदन एइ जन करे
तप्त-काञ्चन-गौराङ्गि
राधा-नाथ देखिते लागिछे भय
राधा-नाथ बड अपरूप लीला
राधा-बल्लभ माधब श्री-पति मुकुन्द
राधा-बल्लभ राधा-बिनोद
राधा-भजने जदि मति नाहि भेला
राधा-माधवयोर् एतद् वक्ष्ये नाम-युगाष्टकम्
राधा सखि जल-केलिषु निपुणा
गृहे राधा वने राधा राधा पृष्ठे पुरः स्थिता
अवीक्ष्यात्मेश्वरीम् काचिद् वृन्दावन-महेश्वरीम्
राधिका कृष्ण राधिका
राधिका-चरण-पद्म सकल-श्रेयेर सद्म
राधिका-चरण-रेनू भूषन करिया तनू
राधिका शरद-इन्दू-निन्दि मूख-मण्डली
राधे कलय हृदयम् अनुकूलम्
राधे जय जय माधव-दयिते
प्रचुर-पुरन्दर-गोप-विनिन्दक-कान्ति-पटलम् अनुकूलं
राधे निज-कुण्ड-पयसि तुङ्गी-कुरु रङ्गम्