चक्षुः साफल्य सम्पादि श्रीमद्
चक्षुः-साफल्य-सम्पादि-श्रीमद्-वक्त्राब्ज-वीक्षण
“च” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
26 भजन
चक्षुः-साफल्य-सम्पादि-श्रीमद्-वक्त्राब्ज-वीक्षण
चञ्चल मुञ्च पटाञ्चल-भागं
चतुर-शिरोमणि कान
चन्दन-चर्चित-नील-कलेवर-पीत-वसन-वन-माली
चन्द्रक-धतु-दल-स्तबकदिक-कृत-मल्लोत्तम-वेशम्
चम्पक दाम हेरि मुरछि रहु माधब
चम्पक शोण कुसुम कनकाचल
जा कि कृपा पान्गु गिरि लाङ्गे
चले निताइ प्रेम-भरे दिग ठलमल करे
नव-गोरोचना-गौरीं प्रवरेन्दीवराम्बराम्
चाणूर-भाषितं वन्दे चाणूरोत्तर-दायकम्
चिकन काला गलाय माला
चिज्-जोडेर द्वैत जिनि कोरेन स्थापन
चिज्जड़ेर द्वैत जिनि कोरेन स्थापन
चित चोर गौर अङ्ग रङ्गे फिरत भकत सङ्ग
रसासार-सुसारोरुर्
चिन्तामणि-मोय राधा-कुण्ड-तट
श्री वृन्दारण्येर् श्री योग-पीठे स-परिकार् श्री गोविन्देर्
चेतन पा-इया गोरा-राय
चेतो-दर्पण-मार्जनं भव-महा-दावाग्नि-निर्वापणं
चैतन्य कल्प-तरु अद्वैत ये शाखा-गुरु
चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
चैतन्य निता-इ आरे दोन भा-इ नाचे रे
चोदिगे गोबिन्द-ध्वनि शुनि पहुं हासे
चौदिके गोबिन्द-ध्वनि शुनि पहुं हासे
चौदिके महान्त मेलि करये कीर्तन-केलि