शक्र श्रवित भौमतिक्रम
शक्र-श्रवित-भौमतिक्रम
“श” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
114 भजन · पृष्ठ 1 / 3
शक्र-श्रवित-भौमतिक्रम
शचि-सुत गौर-हरि नबद्वीपे अबतारि
शची-गर्भ-सिन्धु-माझे गौराङ्ग-रतन राजे
शची ठाकुराणी चारु छान्दे
गदाधर यदा परः स किल कश्चनालोकितो
भाइ रे
शचीर आङ्गिना माझे भुबन=मोहन साजे
शचीर आङ्गिनाय नाचे विश्वम्भर राय
शचीर दुलाल गोरा नाचे
शचीर दुलाल मनो-रङ्गे
शचीर नन्दन जग-जीबन-सार
हरिर् दृष्ट्वा गोष्ठे मुकुर-गतम् आत्मानम् अतुलं
शत-कोटि गोपी माधब-मन
शरद चन्द पबन मन्द
भाइ-रे!
शरीरम् सुरूपम् तथा वा कलत्रं
शरीरेर सुखे मन देहो जलञ्जलि
शान्तिपुर-पति परम सुन्दर
शान्तिपुरेर बऋआ-माली बैकुण्ठ बागान खालि
शारद-शशधर-वीक्षण-हृष्टः
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,
राधा-कृष्ण करोँ ध्यान स्वपने ना बल आन
शुन-इते गौराङ्ग खेद
शुन बृषभानु-नन्दिनी रा-इ
शुन शुन ए सखि निबेदन तोय
शुन हे सु-मति अति निरजने कहिये गुपत कथा
शुनियाछि साधु-मुखे बले सर्व-जन
शुनो राधे एइ रस, आमि ये तोमार वश
हरि हे
शुनो हे रसिक-जन कृष्ण-गुण अगणन
शोभामय शचीर अङ्गने
श्यामर गौर-बरण एक देह
श्यामेर गौर-बरण एक देह
श्यामेर तनु अब गौर-बरण
श्रद्धा-देबि नाम जार दुइति स्वभाब तार
श्रित-कमला-कुच-मण्डल (हे)
श्री-अद्वैतचन्द्र भूप मोर
देहार्बुदानि भगवन् युगपत् प्रयच्छ
श्री उज्ज्वल रस सार स्वभाबतः द्वि-प्रकार
श्री-कृष्णः कमला-नाथो
श्री-कृष्ण-कीर्तने जदि मानस तोहार
किं तपश् चकार तीर्थ-लक्षम् अक्षयं पुरा
कृष्णेर प्रसादे गोप बैसे बृन्दाबने
श्री-कृष्ण-चैतन्य अद्वैत प्रभु नित्यानन्द
श्री कृष्ण चैतन्य गोरा शचीर दुलाल
श्री कृष्ण चैतन्य जय पतित-पाबन
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु जीवे दोया कोरि’
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु दोया कोरो मोरे