हरि कुसुम स्तवकम्
गति-गञ्जित-मत्ततर-द्विरदं
“ह” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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गति-गञ्जित-मत्ततर-द्विरदं
हरि बलब आर मदन-मोहन हेरब गो
'हरि' बोले' मोदेर गौर एलो
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि ! आर कबे पालटिबे दशा
हरि हरि ! कबे हब वृन्दावन-वासी
हरि हरि आमार एमन दशा हबे
हरि हरि आर कि एमन दशा हबे
हरि हरि ऐछे भाग्य होयब हामार
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिन
हरि हरि कबे मोर हो'बे हेनो दिन
हरि हरि कबे मोर होइबे सु-दिने
सबहु बधू-जन चलु बृन्दाबन
हरि हरि गोरा केन कान्दे
हरि हरि निता-इ कबे करुणा करिबे
हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु
हरि हरि मङ्गल भरत क्षिति-मण्डल
हरि हरि! आर कि एमन दशा हब
हरि हरि! कत दिने हेन दशा हब
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिने
हरि हरि! कबे हेन दशा हबे मोर
हरि हरि! कि मोर करम अनुरत
हरि हरि! कि मोर करम अभाग
हरि हरि! कि मोर करम गति मन्द
हरि हरि! कृपा करि राख निज-पदे
हरि हरि! बड शेल मरमे रहिल
हरि हरि! बिफले जनम गोञाइनु
हरि हरि! हेन दिन हैबे आमार
हरि हे दयाल मोर जय राधा-नाथ
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्
हरि-नाम तुया अनेक स्वरूप
हरिन हलिन सह-रिपु-दलिन
हरिम् अभिसर सुन्दरि सितवेशा
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
(हरे) हरये नमः कृष्ण जादबाय नमः
हरे हरे गोबिन्द हरे
हह मोर कि छार अदृष्ट
हा हा ! प्रभु लोकनाथ राख पाद-द्वन्द्वे
हा हा कबे गौर-निताइ
हा हा प्रभु ! कर दया करुणा तोमार
हा हा मोरा गौर-किशोर
हाटेर पत्तन श्री-शचीनन्दन
हुहुङ्कार-गर्जनादि अहो-रात्र-सद्-गुणं
हे गोविन्द हे गोपाल
नीर पीवन हेतु गयो
हेदे हे! नागर बर शुन हे मूरलीधर