चैतन्य चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
भगवान और उनके भक्तों से सीधे, हृदय से की गई विनती के भजन।
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चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
ष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
नमो ब्राह्मण-रूपाय
पषाण-धातु-मृद्-दारु-- सिकता-मणि-लेख-ज
ष्री-कृष्ण तव कारुण्य
दयार प्रभु मोर नबद्वीप-चन्द्र
प्रभु हे! एइ-बार करह करुणा
प्रभुर लागिया यब कोन् देशे
प्राणेश्वरि! एइ बार करुणा कर मोरे
एतल् लीला-स्तवं नाम
बिषय-बासना-रूप चित्तेर बिकार
भक्त-गण-श्री-चरणे मोर ए-इ निबेदने
भबार्णबे पो'डे मोरे आकुल पराण
श्री-गुरु-बैष्णब-कृपा कोत दिने हबे
हरि हरि आर कि एमन दशा हबे
हरि हरि ऐछे भाग्य होयब हामार
हरि हरि निता-इ कबे करुणा करिबे
हह मोर कि छार अदृष्ट
हा हा कबे गौर-निताइ
हा हा मोरा गौर-किशोर