नित्यानन्दो ऽवधूतेन्दुर्
नित्यानन्दो 'वधूतेन्दुर् वसुधा-प्राण-वल्लभः
“न” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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नित्यानन्दो 'वधूतेन्दुर् वसुधा-प्राण-वल्लभः
निदानेर बन्धु तुमि शुनियाछि हरि
निमा-इ चञ्चल खेपा किछु-इ ना माने गो शुन एक दिबसेर कथा
निरवधि मोर मोने गोरा रूप लागियाछे
निराकार निराकार कोरिया चित्कार
निरुपम हेम-ज्योति जिनि बरण
निर्जन कुटीरे श्री राधा चरण
निर्बेद बिषाद मद दैन्य ग्लानि श्रमोन्माद
निवेदन कोरि प्रभु! तोमार चरणे
निशि परभात समये किये पेखलुं, रसम्यअ गौर-किशोर
निशि परभात समये ये-रूप आनन्द शचीर घरे
हरि हे!
नीरद नयाने नब-घन सिञ्चने पूरल मुकुल अबलम्ब
नील-स्कन्धोज्ज्वल-रुचि-भरैर् मण्डिते बाहु-दण्डे
नीलाचले बनकचल गोरा
नृत्यत गौरचन्द्र जन-रञ्जन, नित्यानन्द बिपद-भय-भञ्जन
नृसिंह-कवचं वक्ष्ये
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरि-बलवन्-मातङ्ग माद्यद्घटा
अन्य-अभिलास छाडि ज्ञान कर्म परिहरि