जय जय श्री कृष्ण चैतन्य नित्यानन्द
जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द
“ज” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द
जय जय श्री-चैतन्य पतित-पाबन
जय जय श्री-जनार्दन हरि
नन्द-नन्दनगोपीजन-बल्लभ
जय जय सद्-गुण-सर
जय जय सीता-पति पहुं मोर
अभिनव-कुट्मल-गुच्छ-समुज्ज्वल-कुञ्चित-कुन्तल-भार
जय जय हरि-नाम चिद्-आनन्दामृत-धाम
जय जशोदा-नन्दन कृष्ण गोपाल गोबिन्द
जय दानपति-ध्यात महा-महिम-सञ्चय
जय देब देब महेश्वर रूप
जय नरसिंह श्री नरसिंह
जय यशोदा-नन्दन कृष्ण गोपाल गोविन्द
जय राधा गिरि-वर धारि
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी
जय राधा-माधव राधा-माधव राधे
(जय) राधा-वल्लभ, (जय) राधा-विनोद
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
जय राधे जय राधे राधे
जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री-राधे
जय रे जय रे गोरा श्री-शची-नन्दन
जय रे जय रे जय, ठाकुर नरोत्तम,
जय रे जय रे जय नित्यानन्द राय
जय वत्सासुर-ध्वंसिन् कपित्थ-व्रात-पातन
जय शची-सुत गौर-हरि
जय शिब सुन्दर बिश्व परात्-पर
गोप्य ऊचुः
जरासुतानुबन्धन-क्षितीश-वृन्द-बन्धन-श्रुतेर् अतीव सूरतः सुरर्षिणापि दूरतः
जशोमती-स्तन्य-पायी श्री-नन्द-नन्दन
जानु लम्बित बाहु युगल
जाम्बूनद-चय रुचिर गञ्जन
जार् मुखे भाइ, हरि-कथा नाइ
जिह्वा टाने रस प्रति उपस्थ कदर्थे
जीबन-समाप्त-काले कोरिबो भजन
जीबे कृपा कोरि' गोलोकेर होरि
जीबेर एमन दया कोथा-ओ ना देखि
जीबेर भाग्ये अबनी बिहरे दोन भा-इ
जीवेर भाग्ये अवनी आइल गौरहरि
जीव् जागो, जीव् जागो, गौरचान्द बोले
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
जेइ रति जन्मे जार सेइ मत रस तार
जोग जाग सब छार श्रद्धा सकलेर सार
जोग-पीठोपरि-स्थित अष्ट-सखी-सुबेष्टित
जोब कोरु खेलि आलि सैया बाला
जौवने जखोन, धन-उपार्जने,
ज्ञानी ज्ञान-जोगे कोरिया जतने
ज्ञानी ज्ञान-योगे, कोरिया जतने,