दण्डवत् 49
स्व-बल्य्-अषन-कालिय
“द” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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स्व-बल्य्-अषन-कालिय
सर्वावतार-बीजाय
मृगादि-चेष्ट-क्रीडा-कृद्
जय मुण्जाटवी-भ्रष्ट
प्रावृत्-ष्री-भुषीताराण्य
षरद्-विहार-मधुर
चक्षुः-सफलय-सम्पादि
गोप-कन्या-व्रत-प्रीत
ष्री-वृन्दावन-दूरस्थ
यज्ण-पत्नी-प्रसदार्थ
जय वासव-याग-ज्ण
जनितेन्द्र-रुसं षक्र
ष्री-चतुः-सन-रूपाय
जयाद्भुत-महा-चेष्टा
भीत-लज्जित-देवेस
प्रसीदमे पयो-मग्न
जय जय निज-पादा
प्रसीद भर्तृ-संरूद्ध
गोपिका-नयनास्वाद्य
जय गोपी-गणान्विष्ट
राधाराधित राधेष
पुनः पुलिन-सम्प्राप्त
अत्य्-उच्च-गोपिका-दुःख
अष्टमे सार्वभौमस् त्वम्
विदग्ध-गोपिकागाध
गोपी-विरह-सन्ताप
जल-क्रीदाति-कुषल
परीक्षित्-पृष्ट-रासार्थ
जयाम्बिक-वन-प्राप्त
काम-पाल-सह-क्रीड
अहर्-विरह-सन्तप्त
अरिष्ट-त्रासिताषेष
नारद-ज्णापितोदन्त
जय गोकुल-सन्त्रासि
प्रह्लाद-संह्लादक भक्त-वत्सल
जय भागवत-ष्रेष्ठ
हे मेषायित-गोपाल
जय धन-पति-ध्यात
अक्रूर-वर्णिताषेष
जयाक्रूर-रथारूढ
स्वाफल्कि-सण्चालित-यान-वहं
यमुना-मज्जिताक्रूर
मथुरोपवन-प्राप्त
मथुरा-जन-सम्वीक्ष्य
प्रसीद हे सुदामाख्य
सीता-पते दासाराथे रघुद्वह
सहस-नर्म-सम्प्रष्ना
नानोपयन-ताम्बूल