दण्डवत् 63
जय जय निज-पादा
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 14 / 30
जय जय निज-पादा
प्रसीद भर्तृ-संरूद्ध
गोपिका-नयनास्वाद्य
जय गोपी-गणान्विष्ट
राधाराधित राधेष
पुनः पुलिन-सम्प्राप्त
अत्य्-उच्च-गोपिका-दुःख
अष्टमे सार्वभौमस् त्वम्
विदग्ध-गोपिकागाध
गोपी-विरह-सन्ताप
जल-क्रीदाति-कुषल
परीक्षित्-पृष्ट-रासार्थ
जयाम्बिक-वन-प्राप्त
काम-पाल-सह-क्रीड
अहर्-विरह-सन्तप्त
अरिष्ट-त्रासिताषेष
नारद-ज्णापितोदन्त
जय गोकुल-सन्त्रासि
प्रह्लाद-संह्लादक भक्त-वत्सल
जय भागवत-ष्रेष्ठ
हे मेषायित-गोपाल
जय धन-पति-ध्यात
अक्रूर-वर्णिताषेष
जयाक्रूर-रथारूढ
स्वाफल्कि-सण्चालित-यान-वहं
यमुना-मज्जिताक्रूर
मथुरोपवन-प्राप्त
मथुरा-जन-सम्वीक्ष्य
प्रसीद हे सुदामाख्य
सीता-पते दासाराथे रघुद्वह
सहस-नर्म-सम्प्रष्ना
नानोपयन-ताम्बूल
कंस-कारित-मण्चौघ
रण्ग-प्रवेष-सुभग
चाणूर-भाषिफं वन्दे
सहज-प्रेम-मृदुल
कंस-योषित्-समाष्वासिन्न्
ईष-ज्णान-कृताष्लेष
सद्-वाक्यानन्दित-ष्रीमद्
दया कर मोरे निता-इ दया कर मोरे
दया कोरो मोरे निताइ, दया कोरो मोरे
दयार प्रभु मोर नबद्वीप-चन्द्र
दर्शन आश्लेषन्वित आनुकूल्य सेबाश्रीत
सतां निन्दा नाम्नः परमम् अपराधं वितनुते
हरि हे!
दामिनी-दाम-दमन रुचि दरशने, दूरे गे-ओ दरपकि दाप
दारा-पुत्र-निज-देहो-कुटुम्ब-पालने
आन कथा आन ब्यथा नाहि जेन जाञ तथा