ज्ञानी ज्ञान जोगे कोरिया जतने
ज्ञानी ज्ञान-जोगे कोरिया जतने
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 12 / 30
ज्ञानी ज्ञान-जोगे कोरिया जतने
ज्ञानी ज्ञान-योगे, कोरिया जतने,
झमज्झम् इति वर्षति स्तनित-चक्र-विक्रीडया
ठाकुर वैष्णव-गण करि एइ निबेदन
ठाकुर वैष्णव-पद अवनीर सु-सम्पद
ढल ढल काञ्चा अङ्गेर लाबणी
तं रहसि गतं किशलय-शयन-शयनं
तपत-काञ्चन- कान्ति कलेबर
हरि हे
हरि हे
तव सुनुर् मुहुर् अनयं कुरुते
तातल सैकते, बारि-बिन्दु-सम,
हरि हे
तुमि तो’ मारिबे जारे, के तारे राखिते पारे,
हेरि हे
तुमि सर्वेश्वरेश्वर, ब्रजेन्द्र-कुमार!
(प्रभु हे!) तुवा पदे ए मिनति मोर्
तुवा-भक्ति-अनुकूल जे-जे कार्य होय्
तुवा-भक्ति-प्रतिकूल धर्म जा’ते रोय्
तुँहु दोया-सागोर तारयिते प्राणी
उपासित-पदाम्बुजस् त्वम् अनुरक्त-रुद्रादिभिः
तेज मन हरि-बिमुखन्कि सङ्ग
तैल हरिद्रा आर कुङ्कुम कस्तूरी
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे
हरि हे!
यमलार्जुन-भञ्जनम् आश्रित-रञ्जनम् अहि-गञ्जन-घन-लास्य-भरम्
त्वं पुण्ड्रक-श्लिष्ट-सन्दिष्ट-विस्मेर
त्वम् उपयन्त सखि वनमली
ष्री - कृष्ण जीया मथुरावतीर्ण
आनीत-कंस-सन्त्रास
जय ष्री-मथुरा-नाथ
अद्य-ष्वो-गमन-व्याज
ष्री-जगन्नाथ नीलाद्रि
ष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
नमो ब्राह्मण-रूपाय
पषाण-धातु-मृद्-दारु-- सिकता-मणि-लेख-ज
सर्व-षस्त्राब्धि-पीयुष
ष्री-कृष्ण तव कारुण्य
सूरसेन-महाराज
कंसासुर-बलोद्विग्न
भाद्र-कृष्णाष्टमी-जात
वसुदेव-स्तुतं साक्षाद्
पितृ-प्राग्-जन्म-कथक
कंस-घातित-दुर्गं त्वां