दिशि दिशि रचयन्तीं
दिशि दिशि रचयन्तीं सञ्चरन्-नेत्र-लक्ष्मी
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 15 / 30
दिशि दिशि रचयन्तीं सञ्चरन्-नेत्र-लक्ष्मी
दीक्षा-गुरु कृपा कोरि' मन्त्र-उपदेश
उथाल् देउ आसिछे छुटिया
दुर्लभ मानब-जन्म लभिया सोंसारे
दुष्ट मन! तुमि किसेर् वैष्णव?
दुहुँ जन आ-ओल कुञ्जक माह
दूति विदूरय कोमल-कथनम्
देख अद्वैत गुणेर मणि
देख दु-इ भा-इ गौर निता-इ
देख देख अदभुत सुन्दर शची-सुत
देख देख अपरूप गौराङ्ग बिलास
देख देख जीब गौराङ्ग चान्देर लीला
देख देख देख नित्यानन्द
देख देख मोर नित्यानन्द
देख देख सुन्दर शची-नन्दना
देख देख सोइ मूरतिमय लेह
देख निता-इ-चान्देर माधुरी
देख भा=इ आगम निगमे
देख राधा-माधव मेलि
देख रे देख रे सुन्दर शची-नन्दना
देख शची-नन्दन, जगत जीबन धन, अनुखण प्रेम-धन
देखत बेकत गौर अदभुत
देखत बेकत गौरचन्द्र बेढल भकत-नखत-बृन्द
देखरे भा-इ प्रबल मल्ल-रूप धारी
देखलु गौराङ्गचन्द्र बिभोर
देखि पहुङ्क बिबाह माधुरी को-इ धर-इ ना थेह
देखिते देखिते भुलिबो बा कबे
देखो मन ब्रते जेन ना हओ आच्छन्न
देखो सखि झूलत युगल किशोर
देब देब-रमणी उल्लासे
देब-रमणी-बृन्द बिरचि बेश बिबिध भान्ति
देव हरे भव कारुण्य-शाली
देवता-कार्य-सिद्ध्य्-अर्थं
देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
देहात्म बुद्धि यार सेइ जड देह
देहात्मबुद्धि यार सेइ जड देह
दोयाल् निताइ चैतन्य बोले नाच रे आमार मन
अविरत-रति-बन्धु-स्मेरता-बन्धुर-श्रीः
कलौ यं विद्वंसः स्फुटम् अभियजन्ते द्युति-भराद्
द्विविड-दुरन्त-चरित्र-कोपिन् सज्-जन-मित्र
धन जन देह गेह कृष्णे समर्पण
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
धनि धनि अपरूप रास-बिहार
हरि हे
धर्म-पथे थाकि' कोरो जीवन जापन, भाइ
धुले धुले गोरा चाँद
धृत-वन-मल्य्-अवतंस-लसद्-वन-वेश-ततिर् बल-सङ्गी
ध्वज-वज्राङ्कुश-पङ्कज-कलितम्