श्री कृष्ण चैतन्य बलराम नित्यानन्द
श्री कृष्ण चैतन्य बलराम नित्यानन्द
“श” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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श्री कृष्ण चैतन्य बलराम नित्यानन्द
श्री-कृष्ण-तत्त्व-निर्देशे कृपा यस्य प्रयोजनम्
श्री कृष्ण-नामावली-स्तोत्र
हे कृष्ण करुणा-सिन्धो
श्री-कृष्ण-बिरहे राधिकार दास
श्री-कृष्ण-भजन लागि संसारे आ-इनु
श्री-कृष्ण-सङ्कीर्तने जदि मानस तोहार
श्री-कृष्णस्य कथा-सूत्रं
श्री कृष्णाष्टक
श्री-कृष्णे सेबिबो बोलि' गृह छाडि' कुञ्जे चोलि'
श्री-गुरु-चरण-पद्म, केवल-भकति-सद्म,
ओं अज्ञान-तिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन-शलाकया
श्री-गुरु-बैष्णब-कृपा कोत दिने हबे
श्री-गुरु श्री-गौरचन्द्र बृन्दाबने जुब-द्वन्द्व
कोटि-कन्दर्प-सन्तर्प-विध्वंसन-
मधुर-मृदुल-चित्तः प्रेम-मात्रैक-वित्तः
आस्ये हास्यं तत्र माध्वीकम् अस्मिन्
कृष्ण-प्रसादेन समस्त-शैल-
जाम्बूनदोष्णीष-विराजि-मुक्ता-
श्री गोविन्दाष्टक
नमो महा-वदान्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदाय ते
श्री चैतन्य-नाम-स्तोत्रम्
भाइ रे
गुञ्जावली-वेष्टित-चित्र-पुष्प-
तुँहु दोया-सागर तारयिते प्राणी
श्री नन्द-नन्दनाष्टक
श्री-नन्दानन्दन धन तदीय बल्लभा-गण
साक्षान् महत्तम-महाघन-चिद्-विलास-
पञ्च-तत्त्वात्मकं कृष्णं भक्त-रूप-स्वरूपकम्
मानसं मानसं त्यागाद् उत्कण्ठार्तं निरुन्धतीम्
श्री बिन्दु-माधवाष्टक
मृदु-तलारण्य-जित-रुचिर-दरद-प्रभं
स्वरूप भवतो भवत्व् अयम् इति स्मित-स्निग्धया
श्री-राधा-कृष्ण-पद-कमले मन
तप्त-काञ्चन-गौराङ्गि राधे वृन्दावनेश्वरि
हरि हे!
श्री-रूप पश्चाते आमि रहिब भीत हञा
श्री-चैतन्य-मनो-'भीष्टं स्थापितं येन भू-तले
श्री-रूप-बदने श्री-सचि-कुमार
श्री रूप मञ्जरी कबे मधुर बचने
श्री-रूप-मञ्जरी-पद, सेइ मोर सम्पद,
यः कृष्ण-चैतन्य-कृपैक-वित्तस्
तुलसी मालती यूथी आमलक कुन्द तथि'
वाञ्छा-कल्पतरुभ्यश् च कृपा-सिन्धुभ्य एव च
श्री-शची-अलय अति शोभमय
श्री शचीतनयाष्टक
गदाधर यदा परः स किल कश्चनालोकितो
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्