दण्डवत् 92
कंस-कारित-मण्चौघ
“द” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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कंस-कारित-मण्चौघ
रण्ग-प्रवेष-सुभग
चाणूर-भाषिफं वन्दे
सहज-प्रेम-मृदुल
कंस-योषित्-समाष्वासिन्न्
ईष-ज्णान-कृताष्लेष
सद्-वाक्यानन्दित-ष्रीमद्
दया कर मोरे निता-इ दया कर मोरे
दया कोरो मोरे निताइ, दया कोरो मोरे
दयार प्रभु मोर नबद्वीप-चन्द्र
दर्शन आश्लेषन्वित आनुकूल्य सेबाश्रीत
सतां निन्दा नाम्नः परमम् अपराधं वितनुते
हरि हे!
दामिनी-दाम-दमन रुचि दरशने, दूरे गे-ओ दरपकि दाप
दारा-पुत्र-निज-देहो-कुटुम्ब-पालने
आन कथा आन ब्यथा नाहि जेन जाञ तथा
दिशि दिशि रचयन्तीं सञ्चरन्-नेत्र-लक्ष्मी
दीक्षा-गुरु कृपा कोरि' मन्त्र-उपदेश
उथाल् देउ आसिछे छुटिया
दुर्लभ मानब-जन्म लभिया सोंसारे
दुष्ट मन! तुमि किसेर् वैष्णव?
दुहुँ जन आ-ओल कुञ्जक माह
दूति विदूरय कोमल-कथनम्
देख अद्वैत गुणेर मणि
देख दु-इ भा-इ गौर निता-इ
देख देख अदभुत सुन्दर शची-सुत
देख देख अपरूप गौराङ्ग बिलास
देख देख जीब गौराङ्ग चान्देर लीला
देख देख देख नित्यानन्द
देख देख मोर नित्यानन्द
देख देख सुन्दर शची-नन्दना
देख देख सोइ मूरतिमय लेह
देख निता-इ-चान्देर माधुरी
देख भा=इ आगम निगमे
देख राधा-माधव मेलि
देख रे देख रे सुन्दर शची-नन्दना
देख शची-नन्दन, जगत जीबन धन, अनुखण प्रेम-धन
देखत बेकत गौर अदभुत
देखत बेकत गौरचन्द्र बेढल भकत-नखत-बृन्द
देखरे भा-इ प्रबल मल्ल-रूप धारी
गौर बरण तनु सोहन मोहन
देखि पहुङ्क बिबाह माधुरी को-इ धर-इ ना थेह
देखिते देखिते भुलिबो बा कबे
देखो मन ब्रते जेन ना हओ आच्छन्न
देखो सखि झूलत युगल किशोर
देब देब-रमणी उल्लासे
देब-रमणी-बृन्द बिरचि बेश बिबिध भान्ति
देव हरे भव कारुण्य-शाली