आध आध अङ्ग मिलल
आध आध अङ्ग मिलल राधा कानु
1,440 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,440 भजन · पृष्ठ 3 / 30
आध आध अङ्ग मिलल राधा कानु
आनन्द कन्द निता-इ चान्द
राधा दामोदर-प्रेष्ठा
श्री-कृष्णः परमानन्दो गोविन्दो नन्द-नन्दनः
आनीत-कंस-सन्त्रास-प्रोषित-ज्ञाति-बान्धव
आपनि अचरि ‘प्रभु’ जीवेरे शिखय
आपने नचिते यबे प्रभुर मन हैल
आबेशे अबश अङ्ग धीरे धीरे चले
आमार एमोन भाग्य कोत दिने ह'बे
आमार जीवन, सदा पापे रत,
आमार निताइ मिले ना भोला मन
`आमार’ बोलिते प्रभु! आरे किछु नाइ
आमार समान हीन नाहि ए सोंसारे
आमि अति दिन-मति ब्रज-कुञ्जे निबसति
आमि अति पामर दुर्जन
हरि हे
(आमि) जमुना-पुलिने, कदम्ब-कानने,
आमि तो' दुर्जन अति सदा दुराचार
हरि हे
आमि तो’ स्वानन्द-सुखद-बासी
आमि तोमार् दुःखेर् दुःखी सुखेर् सुखी,
हरि हे
(आमि) पथे पथे घुरि भिखारिणी
हरि हे
आयत नित्यानन्द अदभुत चान्द
आर कि एमन दशा हब
मन दुह्खे काँदे एका कमलिनि राइ गो
आर केनो माया-जाले पर्डितेछो जीब-मीन
नयनेरि जल् झोरे अबिरोल्
आरे आमार गौर-किशोर
आरे आरे मोर निता-इ-चान्द
आरे भा-इ निता-इ आमार दयार अबधि
आरे मोर आरे मोर गोरा द्विज-मणि
आरे मोर आरे मोर गौराङ्ग गोसाञि
आरे मोर आरे मोर नित्यानन्द राय
आरे मोर गौर-किशोर
आरे मोर गौराङ्ग सोणा
आरे मोर नाचत गौर-किशोर
आरे मोर निता-इ नायर
आरे मोर निताइ से नायर
आरे रे निन्दुक भा-इ तोरे किरे बोध ना-इ
आसलो कथा बोल्ते कि
आसलो कथा बोल्ते कि
आहा कि देखि गो बड़-इ कदम्बेर तले
आहा मरि आजु कि आनन्द
आहा मरि गोरा-रूपेर कि दिब तुलना
आहा मरि मरि गौराङ्गचान्देर चरिते केब न झुरे
आहा मरि मरि देख आङ्खि भरि