अपरूप हेम मणि भास
अपरूप हेम-मणि भास
1,440 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,440 भजन · पृष्ठ 2 / 30
अपरूप हेम-मणि भास
अपूर्ब बैष्णब-तत्त्व आत्मार आनन्द
अबतार कैल बड़ बड़
अबनीक माझे देख दोन भा-इ
हरि हे
दीव्यद्-वृन्दारण्य-कल्प-द्रुमाधः
अभिन्न मदन
अभिषेके गौरचन्देर आनन्द अपार
कदा गोष्ठे गोष्ठ-क्षितिप-गृह-देव्या किल तया
अभीर-पल्ली-पति-पुत्र-कान्या
अम्बुदाञ्जनेन्द्र-नील-निन्दि-कान्ति-डम्बरः
अरुण नयन बिबिध भूषण
अरुण बसने बिबिध भूषणे
अरूण-कमल-दले शेष बिछाइब
अरे भाइ! भज मोर गौराङ्ग-चरण
अर्थहीन देखि’ मोरे छेडेछे सबाइ
हरि हे!
अवज्ञाय भर्तुर् महा-घोर-दण्डं
अवतार-सार, गोरा-अवतार, केन ना भजिलि ता'रे
अवधर्य सखि तव सखि-वृत्तम्
अशेष गुणेर निधि गौराङ्ग-सुन्दर
अहो पश्यथ चित्रं गोकुल-रजि-महिमनम्
(पिङ्गलोवाच)
अहोवलं नारसिंहं गत्वा रामः प्रतापवान्
आ-ओत पिरीति मूरति-मय सागर
आगे जनमिल निता-इ चान्द
आँचरे मुख-शशि गोय
आजि आङ्गिन पर नदीया बालक साञे
आजि रसे बादर निशि
आजु आनन्दे निता-इ-चान्दे
आजु कत ना आनन्द मने
आजु कि आनन्द नदीया-नगरे, जगा-इ माधा-इ दोहे देखिबारे
आजु कि आनन्द श्री-शची-भुबने रजनी-प्रभात-काले
आजु कि आनन्द सङ्कीर्तने
आजु गो-धूलि समय शुभ-क्षण, गौर गुण मणि भुबन मोहन,
आजु गोरा नगर-कीर्तने
आजु नव श्याम विनोदिनी रा-इ
आजु पूर्णिमा साज समये राहु शशी गरासि
आजु बिपिने या-ओत कान
आजु बिरह-भाबे गौराङ्गसुन्दर
आजु शची-नन्दन-नब-अभिषेक
आजु शुभ-क्षणे निता-इ-चान्देर
आजु शुभ-क्षणे पोहा-इल निशि
आजु स्नेहेते बिह्वोल हैया
आत्म-निवेदन, तुवा पदे कोरि’,
आत्म-समर्पने गेला अभिमान्
तूमि त दयार सिन्धू अधम-जनार बन्धु
आत्मीय सबाइ भाइ, आत्मार सम्बन्धे