आहा मरि मरि सुर नारी गण, नदीया चान्देर बिबाह देखि
आहा मरि मरि सुर-नारी-गण, नदीया-चान्देर बिबाह देखि
1,440 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,440 भजन · पृष्ठ 4 / 30
आहा मरि मरि सुर-नारी-गण, नदीया-चान्देर बिबाह देखि
आहे नीळ शैल प्रबळ मत्त वारण
तुमि देब नारायण संसार-अधिकारी
(श्री-नारद उवाच)
इह कलि-युग धन्य नित्यानन्द श्री-चैतन्य
सिचयम् उदञ्चय हृदयाद् अल्पं
उह पुरुख-बर बिदगध-शेखर
ईश्वरः परमः कृष्णः
मीमांसमानस्य समुत्थितो ऽग्रतो
उग्रं वीरं महा-विष्णुं
उज्ज्वल-वरण-गौर-वर-देहं
छिन्न-स्वर्ण-विनिन्दि-चिक्कण-रुचिं स्मेरां वयः-सन्धितो
प्रपद्य वृन्दावन-मध्यम् एकः
उदिलो अरुण पूरब-भागे,
ऋतु-पति बिहरति नागर-श्याम
ऋतु-राजार्पित-तोष-तरङ्गम्
ए दुष्ट हृदये काम आदि रिपु छ्हय
ए धनि आञ्चरे बदन झाम्पाँअ
ए धनि मोहे ना करु आरु छन्द
एइ कार्य देखितेछि वृन्दावन माझ
ए-इ त बृन्दाबन-पथे
एइ नव-दासी बलि श्री-रूप चाहिबे
एइ-बार पाइले देखा चरण दु’ खानि
एइ-बारो करुणा कोरो वैष्णव गोसाइ
एओ तो' एक कलिर् चेला
भाइ रे
एक-दिन मने पहुं कैल आचम्बित
भाइ रे
एक बार करुणा कर चैतन्य निता-इ
एक-मुखे कि कहिब गोराचाँदेर लीला
एक्-बार् भाबो मने
एखोन बुझिनु प्रभु! तोमार चरण
एमन गौराङ्ग बिना नाहि आर
एमन निता-इ कोथा-ओ देखि ना-इ
(प्रभु हे!)
एलो रे गौराङ्गचान्द प्रेमे एलोथेलो
एषा लीला विभोर् नित्या गोलोके शुद्ध-धामनि
एहि मुरारे कुञ्जबिहारी
ऐछन बचन कहल यब कान
ओरे मन कर्मेर कुहरे गेलो काल
ओरे मन कि बिपद होइलो आमार
ओरे मन क्लेश-ताप देखि जे अशेष
ओरे मन, बाड़िबार आशा केनो कोरो'?
ओरे मन बारिबार आशा केनो कोरो
ओरे मन बोलि शुनो तत्त्व-बिबरण
ओरे मन भालो नाहि लागे ए सोंसार
ओरे मन भुक्ति-मुक्ति-स्पृहा कोरो दूर
ओरे, वृन्दावनेर् नन्द दुलाल्