प्रभु नित्यानन्द आनन्देर कन्द
प्रभु नित्यानन्द आनन्देर कन्द
“प” अक्षर से शुरू होने वाले सारे वैष्णव भजन और कीर्तन, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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प्रभु नित्यानन्द आनन्देर कन्द
प्रभु नित्यानन्द राम रूपे गुणे अनुपाम
प्रभु हे! एइ-बार करह करुणा
(प्रभु हे!) शुनो मोर् दुःखेर् काहिनी
प्रभुर बचन तखन शुनिया
प्रभुर लागिया यब कोन् देशे
श्रीमान् रास-रसारम्भी वंशी-वट-तट-स्थितः
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
भाइ-रे!
प्रसीद भर्तृ-संरुद्ध गोपी-प्रेमाग्नि-वर्धन
प्राण-प्रिय दुख शुनि शशि-मुखी
प्राणेश्वर! निवेदन एइ जन करे
प्राणेश्वरि! एइ बार करुणा कर मोरे
प्रातर्-भोजन-संयुक्त वत्स-व्रात-पुरःसर
(प्रानेश्वर्!) कोहोबुँ कि सरम कि बात्
शुद्ध-गाङ्गेय-गौराङ्गीम् कुरङ्गी-लङ्गिमेक्षणाम्
श्री-रूप-रति-मञ्जर्योर्
अलम् दीपावल्याम् विपुल-रति गोवर्धन-गिरिम्
प्रियसखि केलि-परिच्छद-पुञ्जम्
प्रीति-प्रावृट्-समारम्भे गोप्यो भावात्मिकास् तदा
प्रेम आगुनि मनहि गुनि गुनि
मधु-मधुर-निशायाम् ज्योतिर्-उद्भासितायाम्
प्रेम बलि नाम अति अद्भुत
रति-प्रेमा मय पर-बन्धे
प्रेम-सिन्धु गोरा-राय निता-इ तरङ्ग ताय
प्रेमसे कोहो श्री कृष्ण-चैतन्य-नित्यानन्द-
महा-भावोज्ज्वलच्-चिन्ता-रत्नोद्भावित-विग्रहाम्
प्रेमे ढल ढल गोरा कलेबर
प्रेमे मत्त नित्यानन्द सहजे आनन्द-कन्द
प्रेमे मत्त महा-बली चले दिग दिग दलि
प्रेमे मत्त महा-बली चले निता-इ दिग दलि
प्रेमे मातोयारा निता-इ नागर
कलहान्तरिता-वृत्ता काचिद् वल्लव-सुन्दरी
माधव घोरे वियोग-तमसि निपपात राधा