सीता नाथ मोर अद्वैतचान्द
सीता-नाथ मोर अद्वैतचान्द
1,440 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,440 भजन · पृष्ठ 29 / 30
सीता-नाथ मोर अद्वैतचान्द
रघु पति राघव राजा राम
सु-रम्य मधुर-स्मित सर्ब-सल्-लखणान्वित
सु-रम्यादि गुण-गण होइयाछे बिभूषण
सुचारु-वक्त्र-मण्डलं सुकर्ण-रत्न-कुण्डलम्
प्रतिभटश्रेणी भीषण वरगुणस्तोम भूषण
सुन्दर कुण्डल नैन विशाल, गले सोहे वैजन्ती-माला
सुन्दर गौर नट-राज
सुन्दर-बाला शची-दुलाला
भजिबो तोमाइ मोर् मन छाइ
गोठे प्रबेश करायल गो-गण
सुन्दर सुन्दर गौराङ्ग सुन्दर, सुन्दर सुन्दर रूप
मणि मञ्जीर यतने आनि धनि
चाँद नेहारि चन्दने तनु लेपन
ऐछन बचन आहल याब सो सखी
सुन्दरि तुहु बड़ि हृदय पाषाण
सुन्दरि पश्य मिलति वन-माली
सुन्दरि माधवम् अवकलयालम्
मन मथ मकर डरहि डर कातर
न हि सङ्गोपय पर-धनम् अधुना त्वं विदिता कुल-पाली
सुन्दरि हरि-अभिसारिक लागि
सुरधुनी-तीरे तीर माहा बिलस-इ
सुलभो भक्ति युक्तानां दुर्दर्शो दुष्ट चेतसां
सूनुर् अद्भुत-सुन्दरो ऽजनि नन्द-राज तवायम्
सो बहु बल्लभ सहजे-इ भोर
सोँअर नब गौर सुन्दर
सोङरि पूरब लीला त्रिभङ्ग हइया
सोणार बरण गोरा प्रेम-बिनोदिया
सोणार बरण गौर सुन्दर
हरि हे
स्थायी भाबाबिष्ट चित्त पाइया बिभाब-बित्त
बचनेर अगोचर बृन्दाबन लीला-स्तल
स्नान करि श्री-गौराङ्ग बसिलेन दिब्यासने
स्नेह-रग-मय-तैल-हरिद्र-परिवलितं मुहुर् अचलम्
स्रस्तं स्रस्तम् उदञ्चयन्त्य् अधिशिरः श्यामं निचोलाञ्चलं
स्व-दयित-गिरि-कच्छे गव्य-दानार्थम् उच्चैः
स्व-भक्ति-योग-लासिनं सदा व्रजे विहारिणम्
स्वप्ने सखि पुनर् अद्य मुकुन्दम्
स्वभाव जनित आर वपु-दोषे क्षणे
श्यामल सुन्दर विविध-विशेषे
गति-गञ्जित-मत्ततर-द्विरदं
हरि बलब आर मदन-मोहन हेरब गो
'हरि' बोले' मोदेर गौर एलो
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि ! आर कबे पालटिबे दशा
हरि हरि ! कबे हब वृन्दावन-वासी
हरि हरि आमार एमन दशा हबे