प्रेमे मत्त महा बली चले दिग दिग दलि
प्रेमे मत्त महा-बली चले दिग दिग दलि
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 20 / 30
प्रेमे मत्त महा-बली चले दिग दिग दलि
प्रेमे मत्त महा-बली चले निता-इ दिग दलि
प्रेमे मातोयारा निता-इ नागर
कलहान्तरिता-वृत्ता काचिद् वल्लव-सुन्दरी
माधव घोरे वियोग-तमसि निपपात राधा
एतल् लीला-स्तवं नाम
फाल्गुन-पुर्णिमा तिथि शुभग सकलि
फाल्गुन-पूर्णिमा निशि शची-अङ्काकासे आसि
फाल्गुन-पूर्णिमा मङ्गलेर सीमा
फाल्गुन-पूर्णिमा शशी राहु चन्द्रेरे परशि
बड अबतार भा-इ बड अबतार
बड-इ दयाल आमार नित्यानन्द राय रे
बन्दे प्रभु नित्यानन्द केबल आनन्द-कन्द
बन्धु-गण शुनोह बचन मोर
बन्धु-सङ्गे यदि तव रङ्ग परिहास, थाके अभिलाष (थाके अभिलाष)
बरज-बिपिने जमुना-कूले
बरज-भूषण-गौर-बिधु-बर, करि बिबाह बिनोद-गति पर
बरणे तडित् बास ताराबली
बल-कृष्नौ बल-वलित-विलसौ
गोलोक-धामाधिपतिः परेश्वरः
बलवान् वैरागी ठाकुर्, किन्तु गृहीर् मध्ये बाहादुर्
बलि-कलि-मत्त-मतङ्गज-मरदन, गौर-सिंह नाचत नदीयाय
बल्लभ-दुहिता लक्ष्मी सु-चरिता
बल्लभ भबने गौर राय
बसुधा जाह्नबा देबी शोभा-बिधि, अधिबास-भूष-भूषित तनु
बस्तुतः सकलि तव, जीव केहो नोय्
बहिर्मुख हो'ये मायारे भजिये
बहु-जन्म-भाग्य-बशे चिन्मोय मधुर रसे
बाच्य ओ बाचक दुइ स्वरूप तोमार
बाजत घन घन बेणु
बान्धिलो माया जे दिन हो'ते
बिबाह करिया बिश्वम्भर
बिभाबित रति जबे क्रियापर हो'ये तबे
बिमल हेम जिनि तनु अनुपम रे
बिरजर परे शुद्ध-परब्योम-धाम
बिरले बसिया एकेश्वर
बिरले बसिया एकेश्वर
बिरले बसिया एकेश्वरे
बिरले वसिया एकेश्वर
बिश्वम्भर-मूर्ति येन मदन-समान
बिश्वे उदित नाम-तपन
बिषय-बासना-रूप चित्तेर बिकार
बृषभानु-सुता- चरण-सेबने
बृषभानु-सुता- चरण-सेवने,
हरि हे
बेश बना-इया सहचरे
बोरो सुखेर् खबोर् गाइ
बोलो हरि बोलो (3 तिमेस्)