पुलके बलित अति ललित हेम तनु
पुलके बलित अति ललित हेम-तनु
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 19 / 30
पुलके बलित अति ललित हेम-तनु
पूरबे गोबर्धन धरल अनुज यार
पूरबे बान्धल चूडा एबे केष-हीन
पूरुबे गोबर्धन धरिल अनुज यार
पूर्ण-चिद्-आनन्द तुमि तोमार चित्-कण आमि
पूर्णिमा-प्रतिपद-सन्धि समय पा-इ राहु गरासल गगन-शशी
पूर्णिमा रजनी चाँद गगने उदय
पूर्बे ये-इ गोपीनाथ श्रीमती राधिका साथ
पद-तले भकत कल्प-तरु सिञ्चित
तोमार् चरण शरण कोरि
गोविन्दास्योत्तंसित-वंशी-क्वणितोद्यल्
सदोपास्यः श्रीमान् धृत-मनुज-कायैः प्रणयिताम्
इन्द्रनील-मणि-मञ्जुल-वर्णः
प्रथमे बन्दिया गाह गौराङ्ग गोसा-ई
प्रदोष-समये श्रीबास-अङ्गने
हरि हे!
प्रफुल्लित कनक-कमल मुख-मण्डल, नयन खण्जन ताहे साजे
प्रबेशिया अन्तः-पुरे नारी-गणे शान्त कोरे
प्रभु तब पद-जुगे मोर निबेदन
प्रभु नित्यानन्द आनन्देर कन्द
प्रभु नित्यानन्द राम रूपे गुणे अनुपाम
प्रभु हे! एइ-बार करह करुणा
(प्रभु हे!) शुनो मोर् दुःखेर् काहिनी
प्रभुर बचन तखन शुनिया
प्रभुर लागिया यब कोन् देशे
श्रीमान् रास-रसारम्भी वंशी-वट-तट-स्थितः
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
भाइ-रे!
प्रसीद भर्तृ-संरुद्ध गोपी-प्रेमाग्नि-वर्धन
प्राण-प्रिय दुख शुनि शशि-मुखी
प्राणेश्वर! निवेदन एइ जन करे
प्राणेश्वरि! एइ बार करुणा कर मोरे
प्रातर्-भोजन-संयुक्त वत्स-व्रात-पुरःसर
(प्रानेश्वर्!) कोहोबुँ कि सरम कि बात्
शुद्ध-गाङ्गेय-गौराङ्गीम् कुरङ्गी-लङ्गिमेक्षणाम्
श्री-रूप-रति-मञ्जर्योर्
अलम् दीपावल्याम् विपुल-रति गोवर्धन-गिरिम्
प्रियसखि केलि-परिच्छद-पुञ्जम्
प्रीति-प्रावृट्-समारम्भे गोप्यो भावात्मिकास् तदा
प्रेम आगुनि मनहि गुनि गुनि
मधु-मधुर-निशायाम् ज्योतिर्-उद्भासितायाम्
प्रेम बलि नाम अति अद्भुत
जूगल-चरण प्रीती परम आनन्द तति
प्रेम-सिन्धु गोरा-राय निता-इ तरङ्ग ताय
प्रेमसे कोहो श्री कृष्ण-चैतन्य-नित्यानन्द-
महा-भावोज्ज्वलच्-चिन्ता-रत्नोद्भावित-विग्रहाम्
प्रेमे ढल ढल गोरा कलेबर
प्रेमे मत्त नित्यानन्द सहजे आनन्द-कन्द