कार्पण्य पञ्जिका स्तोत्र
तिष्ठन् वृन्दाटवी-कुञ्जे विज्ञप्तिम् विदधात्य् असौ
1,440 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
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तिष्ठन् वृन्दाटवी-कुञ्जे विज्ञप्तिम् विदधात्य् असौ
कत कत ब्रज नब बाला
तुमि देब नारायण जगत-अधिकारी
कि आनन्द नदीया-नगरे
कि आनन्द शचीर भबने
कि आर बोलिबो तोरे मन
कि कहिब शत शत तुया अबतार
कि जानि कि बले, तोमार धामेते,
किं तपश् चचार तीर्थ-लक्षम् अक्षयं पुरा
कि भाबे अद्वैत- चान्द अदभुत
कि भाबे बिभोर मोर अद्वैत गोसाञी रे
कि ये शुनि सुधामय मुरलीर रब
कि-रूपे पाइब सेवा मुइ दुराचार
कि हेरिनु ओगो स-इ बिदगध-राज
कि हेरिलाम अपरूप गोरा गुण-निधि
किना से सुखेर सरोबरे
किबा खोल करताल बाजे
किबा श्री-शची-भबन माझे
किये हम पेखलुँ कनक पुतलिया
कीर्तन रसमय आगम अगोचर
कीर्तनेर अङ्ग शुधु नहे ढाक-ढोल
कुङ्कुमाक्त-काञ्चनाब्ज-गर्व-हारि-गौरभा
कुन्द-कुसुमे करु कबरकि भार
कुन्दन कनया कलेबर-कान्ति
तुमि देब नारायण देब महेश्वर्
कुबेर पण्डित अति करषित
कुसुमित वृन्दावने, नाचतो शिखि-गणे,
कृपा कोरो' बैष्णब ठाकुर
कृष्ण कृष्ण कमलेश कृपामय
कृष्ण कृष्ण-भक्त-गण गुण नाम सु-चरित
कृष्ण गोबिन्द हरे
चैतन्यः कृष्ण-चैतन्यो गौराङ्गो द्विज-नायकः
कृष्ण जिनका नाम है, गोकुल जिनका धाम है
यद् अपि समाधिषु विधिर् अपि पश्यति
कृष्ण-नाम धरे कोतो बल्
कृष्ण-प्रसादेन समस्त-शैल
कृष्ण-प्रेम-मयी राधा
कृष्ण-बंशी-गीत शुनि' देखि' चित्र-पत-खनि
कृष्ण-भक्ति बिना कभु नाहि फलोदोय
कृष्ण येइ भजे सेइ हयत’ चतुर
कृष्ण-वार्ता विना आन, 'असद्-वार्ता' बलि' जान,
कृष्ण सह कृष्ण-नाम अभिन्न जानिया
कृष्ण होइते चतुर्-मुख, होय् कृष्ण-सेवोन्मुख,
कृष्ण! कृष्ण! कृष्ण! कृष्ण! कृष्ण! कृष्ण! कृष्ण! हे!
कृष्णाय वासुदेवाय
कृष्णेर जतेक खेला तार मध्ये नर-लीला
कृष्णेर लागिया येबा नित्य युद्ध करे
कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी