गोकुल पति कुल तिलक त्वम् असीह
गोकुल-पति-कुल-तिलक त्वम् असीह
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 8 / 30
गोकुल-पति-कुल-तिलक त्वम् असीह
गोकुल-मङ्गल-वंशी
गोठ बिजयी ब्रज-राज किशोर
गोद्रुम-धामे भजन-अनुकूले
वपुर्-अतुल-तमाल-स्फीत-बाहूरु-शाखो-
मधुर-मृदुल-चित्तः प्रेम-मात्रैक-वित्तः
गोपी-गण-कुच-कुङ्कुमे रञ्जित
गोपी-सौभाग्य-सम्भाव्यं गो-धूलि-च्छुरितालकम्
गोपीनाम् कुच-कुङ्कुमेन निचितम् वासः किम् अस्यारुणम्
गोपीनाथ आमार उपाय नाइ
गोपीनाथ घुचाओ सोंसार-ज्वाला
गोपीनाथ मम निबेदन शुनो
गोबिन्देर अङ्गे पहुं निज अङ्ग दिया
गोरा अबतारे यार न हैल भक्ति-रस
गोरा अभिषेक कथा अद्भुत कथन
गोरा-गुण गा-ओ शुनि
गोरा गुण-मणि प्राण प्रिया-सह बिलसये शोज बासर घरे
गोरा गुण-मणि सुघड शेखर परम मुदित हियाय
गोरा गेला पूर्ब-देश निज-गण पा-इ क्लेश
गोरा दयार अबधि गुण-निधि
गोरा नाचे प्रेम बिनोदिया
गोरा नाचे शचीर दुलालिया
गौरा पहु ना भजिया गोइनु
गोरा-प्रेमे गर गर निता-इ आमार
गोरा-प्रेमे मातिया निता-इ
गोरा बड दयार ठाकुर
गोरा बिधु अधिबास सुखे केना बैसे प्रबेशिया भुबन माझे
गोरा मोर गुणेर सागर
गोरा मोर दयार अबधि गुण-निधि
गोरा मोर शुधा-इ काँचा सोना
गोरा हेम-जलद-अबतार
गोराचन्देर अज्ञ पेये गृह-बासि-गण
गोराचन्देर बिबाह पर-दिने
गोराचान्द बिबाह करिया
गोलोक छाडिय प्रभु केन बा अबनी
गोवर्धन गिरिवर केवल निर्जन स्थल
गोविन्द गोपीनाथ! कृपा करि राख निजपदे
जाम्बूनदोष्णीष-विराजि-मुक्ता-
वेणुं क्वणन्तम् अरविन्द-दलायताक्षम्
गौर-कलेबर मौलि मनोहर चिकुर ऐछे नेहारि
गौर गदाधर दुहुँ तनु
गौर गोकुल-चन्द्र चलु निज गेहे निशि परभात
गौर गोविन्द-गँअ शुन हे रसिक-जन
गौर नब-घन प्रेम-धारा बरिषिल
गौर पहुं ना भजिय मनु
गौर बरण तनु शोहन मोहन सुन्दर
गौर सुन्दर पहुं नदीया उदय करि
गौरचन्देर बिबाह देखिबारे