गौरसुन्दर परम शुभ क्षणे धरल यज्णोपबीत
गौरसुन्दर परम शुभ-क्षणे धरल यज्णोपबीत
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 9 / 30
गौरसुन्दर परम शुभ-क्षणे धरल यज्णोपबीत
गौराङ्ग करुणा कोरो, दीन हीन जने
गौराङ्ग करुणा-सिन्धु अबतार
गौराङ्ग के जाने महिमा तोमार
गौराङ्ग ठेकिल पके
गौराङ्ग तुमि मोरे दया ना छाडिह
गौराङ्ग दयार निधि गुण अगणन
गौराङ्ग नहिते तबे कि ह-इते
गौराङ्ग पतित-पाबन तुया नाम
गौराङ्ग पातकी उद्धार करुणाय
गौराङ्ग-प्रेम-बादले डोबे सब प्रेम-जले
गौराङ्ग बिहर-इ परम आनन्दे
गौराङ्ग बिहर-इ परम आनन्दे
गौराङ्ग रसेर नदी प्रेमेर तरङ्ग
गौराङ्गचान्द हेर नयनेर कोणे
मलय-सुवासित-भूषित-गात्रम्
गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद,
गौरामृत अनुक्षण साधु महान्त मेघ-गण
सुबल-सखाधर-पल्लव-
घरे बोसे चेंचाइया पित्त-वृद्धि करि
घरे बोसे' बाउल् हओ रे मन,
घरे वसे’ चेँचाइया पित्तवृद्धि करि
घरेरे आ-इल प्रभु रत्न लैञा
चक्षुः-साफल्य-सम्पादि-श्रीमद्-वक्त्राब्ज-वीक्षण
चञ्चल मुञ्च पटाञ्चल-भागं
चतुर-शिरोमणि कान
चन्दन-चर्चित-नील-कलेवर-पीत-वसन-वन-माली
चन्द्रक-धतु-दल-स्तबकदिक-कृत-मल्लोत्तम-वेशम्
चम्पक दाम हेरि मुरछि रहु माधब
चम्पक शोण कुसुम कनकाचल
जा कि कृपा पान्गु गिरि लाङ्गे
चले निताइ प्रेम-भरे दिग ठलमल करे
नव-गोरोचना-गौरीं प्रवरेन्दीवराम्बराम्
चाणूर-भाषितं वन्दे चाणूरोत्तर-दायकम्
चिकन काला गलाय माला
चिज्-जोडेर द्वैत जिनि कोरेन स्थापन
चिज्जड़ेर द्वैत जिनि कोरेन स्थापन
चित चोर गौर अङ्ग रङ्गे फिरत भकत सङ्ग
रसासार-सुसारोरुर्
चिन्तामणि-मोय राधा-कुण्ड-तट
श्री वृन्दारण्येर् श्री योग-पीठे स-परिकार् श्री गोविन्देर्
चेतन पा-इया गोरा-राय
चेतो-दर्पण-मार्जनं भव-महा-दावाग्नि-निर्वापणं
चैतन्य कल्प-तरु अद्वैत ये शाखा-गुरु
चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार
चैतन्य निता-इ आरे दोन भा-इ नाचे रे
चोदिगे गोबिन्द-ध्वनि शुनि पहुं हासे
चौदिके गोबिन्द-ध्वनि शुनि पहुं हासे