माधव परिहर पटिम तरङ्गम्
माधव परिहर पटिम-तरङ्गम्
1,438 वैष्णव भजनों और कीर्तनों की पूरी सूची, देवनागरी लिपि, हिन्दी अर्थ और ऑडियो के साथ।
1,438 भजन · पृष्ठ 23 / 30
माधव परिहर पटिम-तरङ्गम्
माधव परिहर मे पटम् एतम्
माधव, बहुत मिनति करि तोय
मानस, देहो, गेहो, जो किछु मोर्
मानुष-भजन् कोर्छो, ओ भाइ, भावेर् गान् धोरे'
हरि हे
मायेर अङ्गुलि धरि शिशु गौर-हरि
मिलत नहिं ऐसा दुर्लभ जन्म,
मिश्र पुरन्दर किछु मने बिचारिया
हृदोय् जमुना, धुकुल चापिया
श्री-वल्लभेति वर-देति दया-परेति
मुक्तेर् गोविन्द-भक्तेर् वितरण-चतुरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
मुख-खानि पुर्णिमार शशी किबा मन्त्र जपे
मुदित नयने हिया भुज-युग चापि
मुनीन्द्र-वृन्द-वन्दिते त्रिलोक-शोक-हारिणि
मुमुचुर् मुनयो देवाः
मृगमद चन्दन, कोरे कोरि सखीगण,
मृत शिशु लो'ये तबे भकत-बत्सल
मेरी पलकोँ मेँ राधा, मेरी अलकोँ मेँ राधा
मोर प्रभु मदन गोपाल
मोरिबो मोरिबो सखि निश्चोय मोरिबो
मोर् मुकुट पीताम्बर सोहै गल वैजन्ती माला
यत यत अबतार सार
यदा हि जीव-विज्ञानं पूर्णम् आसीन् मही-तले
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
यदि ते हरि-पाद-सरोज-सुधा
यशोमती-नन्दन, ब्रज-बरो-नागर,
यस्याः कदापि वसनाञ्चल-खेलनोत्थ-
यामिहे कमिह शरणं सखी-जन-वचन-वञ्चिता
युगल चरणे प्रीति, परम आनन्द ताथि,
ये जन गौराङ्ग भजिते चाय
येषां रागोदितः कृष्णे श्रद्धा वा विमलोदिता
योग-पीठोपरि-स्थित, अष्ट-सखी-सुवेष्टित,
योगीर आसने वसेछिल विश्वामित्र
यौवने जखोन, धन-उपार्जने,
प्रातः पीत-पटे कुचोपरि रुषा घूर्णाभरे लोचने
रङ्गे नाचये शचीर बाला
रजनी-प्रभाते शची-देबी चिते आनन्देर नाहि ओर
रति प्रेम स्नेह मान प्रणय ओ रागाख्यान
रत्य्-आस्वाद हेतु जत बिभाब नामेते ख्यात
रध-रक-शशधर मुरली-कर गोकुल-पति-कुल-पल जय जय कृष्ण हरे
राधा हरिर् अपि पुलकि-वसन्तम्
रधे मैशीर् द्रष्टुम् अनङ्गम्
रमणी-शिरोमणि बृषभानु-नन्दिनी
रमते रमं परितः कृष्णः
रमो रमनुज इति युगलम्
रम्य-तिलक-नव-तुलसी-दल-भर-वन-मलति-विकसी
रस-तत्त्व नित्य जैछे ब्रज-तत्त्व नित्य तैछे